Monthly Archives: December 2015

ज़िंदगी की धूप

ज़िंदगी की धूप में जलते रहेंगे कब तलक मोम का है जिस्म पिघलते रहेंगे कब तलक   छोड़ कर मुझको मेरे लौटे सभी वापस वहीं ऐसे वीराने में अब चलते रहेंगे कब तलक   काश उनसे मुदत्तों पहले कहा होता … Continue reading

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