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फ़ासले

फासलों के दरमियान खो गए हम तुम कहाँ कह रही खामोशियाँ जाएँ तो जाएँ अब कहाँ   साथ में थी, हाथ में थी, हर बात में थी जो खुशी हर इक रात में थी, रूठ क्यों वो गईं तेरी बाहे, … Continue reading

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