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कुछ नहीं बाकी

कहें तो क्या कहें, कहने को कुछ नहीं बाकी, सहेंगे और न, सहने को कुछ नहीं बाकी वो गुड्डीया जो कि बात-बात पर भी रोती थी, अब उसकी आँखों में, बहने को कुछ नहीं बाकी मेरा बेटा गया, बेटी गयी, … Continue reading

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