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बेकरार

मेरे माथे पे शिकन का ये भार रहता है वो आ भी जाएँ घर तो इंतज़ार रहता है   खड़े लाशों के सुतूँ पर किया ऐलान शाह ने हमारे मुल्क के हर घर में प्यार रहता है   करी जो … Continue reading

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