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कुछ ज़ख्म

क्यूँ तुम पे अब भी यूँ मरता है दिल कुछ ज़ख्म भरने से डरता है दिल   जाना कि जब तुम भी महफ़िल में होगे मन ही ये मन में सँवरता है दिल   करूँ जब भी कोशिश मैं तुम … Continue reading

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