Monthly Archives: September 2018

नहीं लगता

  ये कैसा जुर्म है, सज़ा के जो काबिल नहीं लगता करे जो ख़ून अपना क्यों हमे क़ातिल नहीं लगता   वो जिसका हाथ थामे सैंकड़ों मीलों चला दरिया मिला जा कर समुंदर से तो वो साहिल नहीं लगता   … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment