Monthly Archives: November 2018

लेकिन

  करी थी मैंने शब-ओ-रोज़ ये दुआ लेकिन हुआ ना मुझसे मेरा हाल-ए-दिल बयान लेकिन   तेरी ज़ुल्फ़ों की छाओ में मिले दुनिया से नजात ये ख्वाब ही सही है इसका आसरा लेकिन   हुए बिछड़े हमे बरसों तो क्यूँ … Continue reading

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