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नहीं

Dedicated to this famous ghazal by Bashir Badr   कोई हमसफ़र,कोई हमनशीं,कोई हमनफ़स,कोई हमयकीन, मेरे पास लोग हज़ार थे, मेरे साथ कोई चला नहीं   कई ज़ख़्म जिनकी दवा नहीं, कई जुर्म जिनकी सज़ा नहीं मुझे छोड़ के तू गया … Continue reading

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