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मुझ को

  हवा सा तू है चारों सू मगर दिखता नहीं मुझ को जो लौटा इब्तिदा पे मैं, मिला फिर तू वहीं मुझ को   करी मेरी खता जो माफ़ फिर काहे की मायूसी तेरी आँखों में क्यूँ छुपति दिखी थोड़ी … Continue reading

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