Author Archives: nihitkaul

पर काट के

पर काट के मेरे मुझे लाचार कर दिया पिंजरे को खोल के उसे मज़ार कर दिया तुम से तो है अच्छी मेरी दुश्मन से गुफ़्तगू नफ़रत का ही सही मगर, इज़हार कर दिया ज़िन्दगी ने उम्र भर रखा गिरफ़्त में … Continue reading

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कुछ नहीं बाकी

कहें तो क्या कहें, कहने को कुछ नहीं बाकी, सहेंगे और न, सहने को कुछ नहीं बाकी वो गुड्डीया जो कि बात-बात पर भी रोती थी, अब उसकी आँखों में, बहने को कुछ नहीं बाकी मेरा बेटा गया, बेटी गयी, … Continue reading

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अँधेरा

अँधेरा गले मिल के रोता है मुझसे ये होने का नाटक, न होता है मुझसे   जो भाई ने मुझको दी गाली कभी कानों ने निघली वो चुभती नहीं             कहूँ क्या मैं उस्से वो छोटा है मुझसे   वो … Continue reading

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तेरी परछाई

आज घर आई, तेरी परछाई बातें सुनाईं, यादें दिखाईं   बाहों में जकड़के, मुझ को कैद करके थामे जो कलाई, मांगे है रिहाई आज घर आई, तेरी परछाई   वादे सब झूटे, चूड़ियों से टूटे, तेरी जो कलाई, गैर ने … Continue reading

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आरज़ू

है मेरी यह आरज़ू बैठी हो तू रूबरू कर रहे हम गुफ्तगू नज़रों में हो तू ही तू, आरज़ू, रूबरू, गुफ्तगू, तू ही तू है मेरी यह आरज़ू   ज़िंदगी के मोड पर, बोलो मिलोगी छोड़कर, दिल की डोरी, माँ … Continue reading

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एहसास पाएँ

रिश्ते निचोड़े, राहों को मोड़े गाने कुछ गायें, एहसास पाएँ खुद को झिंझोड़ें, कसमों को तोड़ें फिर गुनगुनाएँ, एहसास पाएँ           भूली सी यादों को, बचपन के वादों को,         टूटे इरादों को, फिर से बनाएँ         एहसास पाएँ   हँसते थे … Continue reading

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छुआ जो तूने

छुआ जो तू, ने मुझे यूँ, लागा कि ज्यूं, काँपा बदन         कोने में जो, सोई थी वो,         जागी है लो, फिर वो अगन सच है क्या ये, तुम हो मेरे, शाम ढले, घबराए मन   तन्हा थी मैं, वीरां थी … Continue reading

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