Author Archives: nihitkaul

आरज़ू

है मेरी यह आरज़ू बैठी हो तू रूबरू कर रहे हम गुफ्तगू नज़रों में हो तू ही तू, आरज़ू, रूबरू, गुफ्तगू, तू ही तू है मेरी यह आरज़ू   ज़िंदगी के मोड पर, बोलो मिलोगी छोड़कर, दिल की डोरी, माँ … Continue reading

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एहसास पाएँ

रिश्ते निचोड़े, राहों को मोड़े गाने कुछ गायें, एहसास पाएँ खुद को झिंझोड़ें, कसमों को तोड़ें फिर गुनगुनाएँ, एहसास पाएँ           भूली सी यादों को, बचपन के वादों को,         टूटे इरादों को, फिर से बनाएँ         एहसास पाएँ   हँसते थे … Continue reading

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छुआ जो तूने

छुआ जो तू, ने मुझे यूँ, लागा कि ज्यूं, काँपा बदन         कोने में जो, सोई थी वो,         जागी है लो, फिर वो अगन सच है क्या ये, तुम हो मेरे, शाम ढले, घबराए मन   तन्हा थी मैं, वीरां थी … Continue reading

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फ़ासले

फासलों के दरमियान खो गए हम तुम कहाँ कह रही खामोशियाँ जाएँ तो जाएँ अब कहाँ   साथ में थी, हाथ में थी, हर बात में थी जो खुशी हर इक रात में थी, रूठ क्यों वो गईं तेरी बाहे, … Continue reading

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कुछ

मुख़्तलिफ़ रिश्ते हैं , दिलचस्प हैं, बेजान कुछ थके हारे भी हैं, वाक़िफ भी हैं, अ‍नजान कुछ   कैसे  उम्मीद  करूं  उनसे मैं अपनों पै रहम हम सभी में  छुपे बैठे हैं जब हैवान कुछ   चंद सिक्कों के लिये … Continue reading

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क्या करूँ

रोज़ घुट घुट के मरूँ या एक दिन जी भर मरूँ क्या करूँ मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ   जल रहा है जो वो मेरा ही तो घर है, या नहीं छोड़कर जिसको गए थे लौट … Continue reading

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सूना सूना दिन

 सूना सूना दिन, सूनी रात आई रे, मोरे कोरे होठों, पे न बात आई रे। भारी पलकें, हल्के-हल्के, ख्वाब देखे हैं, चढ़ती रात पे शाम भी कुछ धूप फेंके है, शाम फिर हारी, फिर से रात आई रे। मन की … Continue reading

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