Author Archives: nihitkaul

चल कर तो देखो

गर मोम हो तुम पिघल कर तो देखो दो चार पल साथ चल कर तो देखो गैरों को जो चाहते हो बदलना अपने को पहले बदल कर तो देखो मेरे लड्खाड़ने की तुम फ़िक्र छोड़ो खुद ही गिर रहे हो … Continue reading

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बेकरार

मेरे माथे पे शिकन का ये भार रहता है वो आ भी जाएँ घर तो इंतज़ार रहता है   खड़े लाशों के सुतूँ पर किया ऐलान शाह ने हमारे मुल्क के हर घर में प्यार रहता है   करी जो … Continue reading

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क्यों है

अब अक्स भी मेरा लगे मेहमान सा क्यों है गर हमसफर है तू तो यूं अनजान सा क्यों है        क्यूँ पूछते हो तुम जवाब जानते हो जब        क्यूँ मार के कहो की तू बेजान सा क्यूँ है अपने … Continue reading

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पर काट के

पर काट के मेरे मुझे लाचार कर दिया पिंजरे को खोल के उसे मज़ार कर दिया तुम से तो है अच्छी मेरी दुश्मन से गुफ़्तगू नफ़रत का ही सही मगर, इज़हार कर दिया ज़िन्दगी ने उम्र भर रखा गिरफ़्त में … Continue reading

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कुछ नहीं बाकी

कहें तो क्या कहें, कहने को कुछ नहीं बाकी, सहेंगे और न, सहने को कुछ नहीं बाकी वो गुड्डीया जो कि बात-बात पर भी रोती थी, अब उसकी आँखों में, बहने को कुछ नहीं बाकी मेरा बेटा गया, बेटी गयी, … Continue reading

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अँधेरा

अँधेरा गले मिल के रोता है मुझसे ये होने का नाटक, न होता है मुझसे   जो भाई ने मुझको दी गाली कभी कानों ने निघली वो चुभती नहीं             कहूँ क्या मैं उस्से वो छोटा है मुझसे   वो … Continue reading

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तेरी परछाई

आज घर आई, तेरी परछाई बातें सुनाईं, यादें दिखाईं   बाहों में जकड़के, मुझ को कैद करके थामे जो कलाई, मांगे है रिहाई आज घर आई, तेरी परछाई   वादे सब झूटे, चूड़ियों से टूटे, तेरी जो कलाई, गैर ने … Continue reading

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