Author Archives: nihitkaul

फ़ासले

फासलों के दरमियान खो गए हम तुम कहाँ कह रही खामोशियाँ जाएँ तो जाएँ अब कहाँ   साथ में थी, हाथ में थी, हर बात में थी जो खुशी हर इक रात में थी, रूठ क्यों वो गईं तेरी बाहे, … Continue reading

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कुछ

मुख़्तलिफ़ रिश्ते हैं , दिलचस्प हैं, बेजान कुछ थके हारे भी हैं, वाक़िफ भी हैं, अ‍नजान कुछ   कैसे  उम्मीद  करूं  उनसे मैं अपनों पै रहम हम सभी में  छुपे बैठे हैं जब हैवान कुछ   चंद सिक्कों के लिये … Continue reading

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क्या करूँ

रोज़ घुट घुट के मरूँ या एक दिन जी भर मरूँ क्या करूँ मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ   जल रहा है जो वो मेरा ही तो घर है, या नहीं छोड़कर जिसको गए थे लौट … Continue reading

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सूना सूना दिन

 सूना सूना दिन, सूनी रात आई रे, मोरे कोरे होठों, पे न बात आई रे। भारी पलकें, हल्के-हल्के, ख्वाब देखे हैं, चढ़ती रात पे शाम भी कुछ धूप फेंके है, शाम फिर हारी, फिर से रात आई रे। मन की … Continue reading

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ज़िंदगी की धूप

ज़िंदगी की धूप में जलते रहेंगे कब तलक मोम का है जिस्म पिघलते रहेंगे कब तलक   छोड़ कर मुझको मेरे लौटे सभी वापस वहीं ऐसे वीराने में अब चलते रहेंगे कब तलक   काश उनसे मुदत्तों पहले कहा होता … Continue reading

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नाटक

लो निभाते जा रहे हैं, आज फिर किरदार को, कोई नकली न कहे, नाटक से अपने प्यार को   हाँ ये नाटक ही तो है, मानो बुरा ना बात का, हम तो सब कठपुतलियाँ, किस्सा है सारा हाथ का जो … Continue reading

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#10book

I was posed the #10book challenge by my friend Swathi Prabhu and here is my attempt at listing 10 of the most wonderful books that I have cherished reading (coupled with some associated memories). It was so much fun going … Continue reading

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