Category Archives: Hindi – Urdu

लगता है मुझे

    ये मेरा अक्स परेशान सा लगता है मुझे मेरा माज़ी गुमे सामान सा लगता है मुझे     एक बस तू ही नहीं, मैं नहीं वाकिफ़ जिस से, शहर का शहर अब अनजान सा लगता है मुझे   … Continue reading

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याद भी आते नहीं

  कह दिया मैंने की तुम अब याद भी आते नहीं दर्द तो होता है पर हम ज़ख़्म दिखाते नहीं   ज़िंदगी बाज़ार है मिलते हैं बस शिकवे-गिले पूछते हो तुम की क्यूँ बाज़ार हम जाते नहीं   कल जिन्हें … Continue reading

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चलने से पहले

रात यह सुनसान सी आई है दिन ढलने से पहले आ गये मंज़िल पे हम पहला कदम चलने से पहले ख़ौफ़ की आँधी चली, है कांपती हर इक कली, ओड़ती है ओस की चादर वो अब खिलने से पहले क्या … Continue reading

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बाँध दो रोटी

सुनो अब बाँध दो रोटी, मुसाफिर चलने वाला है

– निहित कौल ‘गर्द’ Continue reading

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मुझ को

  हवा सा तू है चारों सू मगर दिखता नहीं मुझ को जो लौटा इब्तिदा पे मैं, मिला फिर तू वहीं मुझ को   करी मेरी खता जो माफ़ फिर काहे की मायूसी तेरी आँखों में क्यूँ छुपति दिखी थोड़ी … Continue reading

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पर काट के

पर काट के मेरे मुझे लाचार कर दिया पिंजरे को खोल के उसे मज़ार कर दिया तुम से तो है अच्छी मेरी दुश्मन से गुफ़्तगू नफ़रत का ही सही मगर, इज़हार कर दिया ज़िन्दगी ने उम्र भर रखा गिरफ़्त में … Continue reading

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तेरी परछाई

आज घर आई, तेरी परछाई बातें सुनाईं, यादें दिखाईं   बाहों में जकड़के, मुझ को कैद करके थामे जो कलाई, मांगे है रिहाई आज घर आई, तेरी परछाई   वादे सब झूटे, चूड़ियों से टूटे, तेरी जो कलाई, गैर ने … Continue reading

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