Category Archives: Hindi – Urdu

मुझ को

  हवा सा तू है चारों सू मगर दिखता नहीं मुझ को जो लौटा इब्तिदा पे मैं, मिला फिर तू वहीं मुझ को   करी मेरी खता जो माफ़ फिर काहे की मायूसी तेरी आँखों में क्यूँ छुपति दिखी थोड़ी … Continue reading

Posted in Hindi - Urdu | Leave a comment

पर काट के

पर काट के मेरे मुझे लाचार कर दिया पिंजरे को खोल के उसे मज़ार कर दिया तुम से तो है अच्छी मेरी दुश्मन से गुफ़्तगू नफ़रत का ही सही मगर, इज़हार कर दिया ज़िन्दगी ने उम्र भर रखा गिरफ़्त में … Continue reading

Posted in Hindi - Urdu | Leave a comment

तेरी परछाई

आज घर आई, तेरी परछाई बातें सुनाईं, यादें दिखाईं   बाहों में जकड़के, मुझ को कैद करके थामे जो कलाई, मांगे है रिहाई आज घर आई, तेरी परछाई   वादे सब झूटे, चूड़ियों से टूटे, तेरी जो कलाई, गैर ने … Continue reading

Posted in Hindi - Urdu | Leave a comment

फ़ासले

फासलों के दरमियान खो गए हम तुम कहाँ कह रही खामोशियाँ जाएँ तो जाएँ अब कहाँ   साथ में थी, हाथ में थी, हर बात में थी जो खुशी हर इक रात में थी, रूठ क्यों वो गईं तेरी बाहे, … Continue reading

Posted in Hindi - Urdu | 1 Comment

कुछ

मुख़्तलिफ़ रिश्ते हैं , दिलचस्प हैं, बेजान कुछ थके हारे भी हैं, वाक़िफ भी हैं, अ‍नजान कुछ   कैसे  उम्मीद  करूं  उनसे मैं अपनों पै रहम हम सभी में  छुपे बैठे हैं जब हैवान कुछ   चंद सिक्कों के लिये … Continue reading

Posted in Hindi - Urdu, Translated | Leave a comment

सूना सूना दिन

 सूना सूना दिन, सूनी रात आई रे, मोरे कोरे होठों, पे न बात आई रे। भारी पलकें, हल्के-हल्के, ख्वाब देखे हैं, चढ़ती रात पे शाम भी कुछ धूप फेंके है, शाम फिर हारी, फिर से रात आई रे। मन की … Continue reading

Posted in Hindi - Urdu, Translated | Tagged | Leave a comment

ज़िंदगी की धूप

ज़िंदगी की धूप में जलते रहेंगे कब तलक मोम का है जिस्म पिघलते रहेंगे कब तलक   छोड़ कर मुझको मेरे लौटे सभी वापस वहीं ऐसे वीराने में अब चलते रहेंगे कब तलक   काश उनसे मुदत्तों पहले कहा होता … Continue reading

Posted in Hindi - Urdu, Translated | 2 Comments