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बेकरार

मेरे माथे पे शिकन का ये भार रहता है वो आ भी जाएँ घर तो इंतज़ार रहता है   खड़े लाशों के सुतूँ पर किया ऐलान शाह ने हमारे मुल्क के हर घर में प्यार रहता है   करी जो … Continue reading

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क्यों है

अब अक्स भी मेरा लगे मेहमान सा क्यों है गर हमसफर है तू तो यूं अनजान सा क्यों है        क्यूँ पूछते हो तुम जवाब जानते हो जब        क्यूँ मार के कहो की तू बेजान सा क्यूँ है अपने … Continue reading

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पर काट के

पर काट के मेरे मुझे लाचार कर दिया पिंजरे को खोल के उसे मज़ार कर दिया तुम से तो है अच्छी मेरी दुश्मन से गुफ़्तगू नफ़रत का ही सही मगर, इज़हार कर दिया ज़िन्दगी ने उम्र भर रखा गिरफ़्त में … Continue reading

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कुछ नहीं बाकी

कहें तो क्या कहें, कहने को कुछ नहीं बाकी, सहेंगे और न, सहने को कुछ नहीं बाकी वो गुड्डीया जो कि बात-बात पर भी रोती थी, अब उसकी आँखों में, बहने को कुछ नहीं बाकी मेरा बेटा गया, बेटी गयी, … Continue reading

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अँधेरा

अँधेरा गले मिल के रोता है मुझसे ये होने का नाटक, न होता है मुझसे   जो भाई ने मुझको दी गाली कभी कानों ने निघली वो चुभती नहीं             कहूँ क्या मैं उस्से वो छोटा है मुझसे   वो … Continue reading

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आरज़ू

है मेरी यह आरज़ू बैठी हो तू रूबरू कर रहे हम गुफ्तगू नज़रों में हो तू ही तू, आरज़ू, रूबरू, गुफ्तगू, तू ही तू है मेरी यह आरज़ू   ज़िंदगी के मोड पर, बोलो मिलोगी छोड़कर, दिल की डोरी, माँ … Continue reading

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एहसास पाएँ

रिश्ते निचोड़े, राहों को मोड़े गाने कुछ गायें, एहसास पाएँ खुद को झिंझोड़ें, कसमों को तोड़ें फिर गुनगुनाएँ, एहसास पाएँ           भूली सी यादों को, बचपन के वादों को,         टूटे इरादों को, फिर से बनाएँ         एहसास पाएँ   हँसते थे … Continue reading

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